यह मंदिर केवल ईंट और पत्थरों से निर्मित भवन नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मसम्मान, सेवा और अटूट भक्ति की जीवित पहचान है।
श्री वीर पंचमुखी हनुमान मंदिर, ऊगरपुर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि श्रद्धा, संघर्ष, सेवा और अटूट विश्वास का प्रतीक है।
यह मंदिर प्रभु श्री हनुमान जी की कृपा, भक्ति और निःस्वार्थ समर्पण से निर्मित एक पावन आध्यात्मिक केंद्र है।

कभी एक छोटा सा बालक अपने गाँव ऊगरपुर से साइकिल द्वारा शहर पढ़ने जाया करता था। उसी रास्ते में एक अत्यंत प्राचीन हनुमान मंदिर पड़ता था।
हर दिन वह मंदिर अंधेरे में डूबा हुआ दिखाई देता। न वहाँ रोशनी थी और न ही कोई व्यवस्था।
उस छोटे बालक ने अपनी बचाई हुई पॉकेट मनी से तार, बल्ब और आवश्यक सामान खरीदा और बिना किसी को बताए मंदिर में रोशनी करवा दी।

समय बीतता गया। वह बालक पढ़ाई में आगे बढ़ा, इंजीनियर बना और जीवन में सफलता प्राप्त की।
लेकिन एक दिन उसे यह समाचार मिला कि जिस मंदिर से उसकी आस्था जुड़ी थी, वह विवादों और परिस्थितियों के कारण टूट चुका है।
यह जानकर उसने मंदिर पुनर्निर्माण का संकल्प लिया। निर्माण प्रारंभ हुआ, लेकिन सरकारी परियोजनाओं और अनेक बाधाओं के कारण कार्य रोक दिया गया।

जब एक अन्य प्राचीन मंदिर की मरम्मत का प्रयास किया गया, तब समाज की जातिगत सोच ने उस बालक और उसके परिवार के आत्मसम्मान को आहत किया।
तभी उसने संकल्प लिया कि वह ऐसा मंदिर बनाएगा जहाँ हर व्यक्ति — चाहे वह किसी भी जाति, समाज या धर्म से हो — सम्मानपूर्वक भगवान के दर्शन कर सके।

कई महीनों के संघर्ष के बाद गाँव के एक हनुमान भक्त ने मंदिर निर्माण के लिए भूमि दान में दी।
सबसे अद्भुत बात यह थी कि वह भूमि उसी बालक के घर के ठीक सामने थी।
प्रभु श्री हनुमान जी की कृपा, अटूट विश्वास और सेवा-भाव के कारण अनेक कठिनाइयों के बाद मंदिर निर्माण 20 अप्रैल 2026 को पूर्ण हुआ।